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Monday, April 2, 2018

डाईबेटीज़

ये मुँह से कुछ नहीं बोलते हैं
बस हवा में चीनी घोलते हैं। 

रोज़-सुबह-तड़के-सवेरे बाग़ में आ के दौड़ते हैं 
रोज़  वर्ज़िश करते हैं 
वज़न को भिगो कर वाष्प में घोलते हैं, हर खाने को नापते-तौलते हैं 
ये मुँह से कुछ नहीं बोलते हैं
बस हवा में चीनी घोलते हैं। 

मीठी चाय से परहेज़ है पर बर्फी के टुकड़े से भी न ग़ुरेज़ है 
फिर भी चीनी से कतराते हैं और करेला घोल के पी जाते हैं 
ये मुँह से कुछ नहीं बोलते हैं
बस हवा में चीनी घोलते हैं। 

ये ऊंचे बड़े पदों पे आसीन हैं 
बातों में कल की फ़िक्र है,  भविष्य का ज़िक्र है 
इनकी हर क्रिया - एक योजना है 
इसीलिए हर दो घंटे पे खाना खोजना है 
ये मुँह से कुछ नहीं बोलते हैं
बस हवा में चीनी घोलते हैं। 

इनके मस्तिष्क में बल है और पपीता ही इनका राष्ट्रीय फल है 
अक्सर अपने लहू में चीनी का माप टटोलते हैं  
ये मुँह से कुछ नहीं बोलते हैं
बस हवा में चीनी घोलते हैं। 

दूर से देखने में बहुत फिट लगते हैं , अपने आप में सिमटे लगते हैं 
शायद इसलिए.... ये मुँह से कुछ नहीं बोलते हैं 
बस हवा में चीनी घोलते हैं। 

अपनी उधेड़-बुन में रहने वालो. मान के मेरी ख़द को सम्भालो 
छोड़ भविष्य की फ़िक्र एक नज़र "आज " पर डालो 
पर तुम नहीं मानोगे , सिर्फ़ हल्का सा मुस्कुराओगे 
मुँह से कुछ नहीं बोलोगे
बस हवा में चीनी घोलोगे।




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